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Saturday, January 4, 2020 6:20 PM

Love Shayaris Dil ke kone se ek aavaaz aatee hai



दिल के कोने से एक आवाज़ आती है
हमें हर पल उनकी याद आती है
दिल पूछता है बार – बार हमसे
के जितना हम याद करते है उन्हें
क्या उन्हें भी हमारी याद आती है
Unknown

Tuesday, December 31, 2019 6:30 PM

Kitna bhi mushkil safar ho Zindagi ka

Kitna bhi mushkil safar ho Zindagi ka,
Jo mohabbat ka sath milke Asaani se kat jata hai.

Unknown

Monday, October 14, 2019 12:00 PM

Life Shayari jab phaisala aasamaan vaale ka hota hai,

जब फैसला आसमान वाले का होता है,
तब कोई बकालत जमीन वाले की नही होती है।  
Unknown

Friday, October 11, 2019 12:46 PM

Life Shayari Kisee ne kya khoob kaha hai

किसी ने क्या खूब कहा है,
ज़िन्दगी के सिर्फ दो दिन है,
एक दिन आपके हक में होती है,
और एक दिन आपके खिलाफ होती है,
जिस दिन आपके हक में हो तो कभी अभिमान मत करना,
और जिस दिन आपके खिलाफ हो तो थोड़ा सब्र करना।

Unknown

Sunday, October 28, 2018 9:03 PM

Zakir Khan 2 Lines

Poetry


Bus Ka Intezaar Karte Hue,
Metro Mein Khade Khade
Rikshaw Me Baithe Hue
Gehre Shunya Me Kya Dekhte Rehte Ho?
Gumm Sa Chehra Liye Kya Sochte Ho?
Kya Khoya Aur Kya Paya Ka Hisaab Nahi Laga Paaye Na Iss Baar Bhi?
Ghar Nahi Jaa Paye Na Iss Baar Bhi?
Apne Aap Ke Bhi Picche Khada Hoon Mai,
Zindagi, Kitne Dheere Chala Hoon Mai…
Aur Mujhe Jagaane Jo Aur Bhi Haseen Hokar Aate The,
Unn Khwaabon Ko Sach Samajhkar Soya Raha Hoon Mai….
Suno, Tumhari kahani sunni hai… Shuru se… ek bar phir se.

Maasum Ladki

BOHOT MAASUM LADKI HAI, ISHQ KI BAAT NAHI SAMAJHTI,
NA JAANE KIS DIN MEIN KHOI REHTI HAI, MERI RAAT NAHI SAMJHTI…
HAAN, HMM, SAHI BAAT HAI…! TO KEHTI HAI,
ALFAAZ SAMAJH LETI HAI MAGAR JAZBAAT NAHI SAMJHTI…

Zakir Khan Shayari- Yeh sab kuch jo nhool gayi thi tum...


ऐ अदम के मुसाफ़िरो होशियार
राह में ज़िंदगी खड़ी होगी
दुश्मनों से क्या ग़रज़ दुश्मन हैं वो
दोस्तों को आज़मा कर देखिए
अब वो आग नहीं रही, न शोलो जैसा दहकता हूँ,
रंग भी सब के जैसा है, सबसे ही तो महेकता हूँ…
एक आरसे से हूँ थामे कश्ती को भवर में,
तूफ़ान से भी ज्यादा साहिल से डरता हूँ…

Zakir Khan Shayari-Dusmano ki jafa ka khof nahi

दुश्मनों की जफ़ा का ख़ौफ़ नहीं
दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं
आशिक़ी हो कि बंदगी ‘फ़ाख़िर’
बे-दिली से तो इब्तिदा न करो
भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए
तुम से कहीं मिला हूँ मुझे याद कीजिए  
कौन जाने कि इक तबस्सुम से
कितने मफ़्हूम-ए-ग़म निकलते हैं
देखने वालो तबस्सुम को करम मत समझो
उन्हें तो देखने वालों पे हँसी आती है
अब न आएँगे रूठने वाले
दीदा-ए-अश्क-बार चुप हो जा

Zakir Khan Shayari -मार डाला मुस्कुरा कर नाज़ से

मार डाला मुस्कुरा कर नाज़ से
हाँ मिरी जाँ फिर उसी अंदाज़ से
मैं भी हैरान हूँ ऐ ‘दाग़’ कि ये बात है क्या
वादा वो करते हैं आता है तबस्सुम मुझ को
दिल तो रोता रहे ओर आँख से आँसू न बहे
इश्क़ की ऐसी रिवायात ने दिल तोड़ दिया 
ऐ दिल-ए-बे-क़रार चुप हो जा
जा चुकी है बहार चुप हो जा
हम से पूछो न दोस्ती का सिला
दुश्मनों का भी दिल हिला देगा
हम ने सुना था की दोस्त वफ़ा करते हैं “फ़राज़”
जब हम ने किया भरोसा तो रिवायत ही बदल गई

Zakir Khan Shayari- kamyaab,tere liye humne khudko kuch yun taiyaar kar liya,...


इश्क़ को मासूम रहने दो , नोटबुक के आखरी पन्ने पर,
आप उससे किताबों में डाल के मुश्किल न कीजिये…
रफ़ीक़ों से रक़ीब अच्छे जो जल कर नाम लेते हैं
गुलों से ख़ार बेहतर हैं जो दामन थाम लेते हैं
कितनी पामाल उमंगों का है मदफ़न मत पूछ
वो तबस्सुम जो हक़ीक़त में फ़ुग़ाँ होता है

Zakir Khan Shayari Titli


वो तितली की तरह आयी और ज़िन्दगी को बाग कर गयी
मेरे जितने भी नापाक थे इरादे, उन्हें भी पाक कर गयी।
माना की तुमको भी इश्क़ का तजुर्बा कम् नहीं,
हमने भी तो बागो में है कई तितलियाँ उड़ाई…
ज़िन्दगी से कुछ ज्यादा नहीं बास इतनी सी फरमाइश है ,
अब तस्वीर से नहीं, तफ्सील से मिलने की ख्वाइश है…
यूँ तो भूले है हमे लोग कई पहले भी बोहोत से,
पर तुम जितना उनमे से कभी कोई याद नहीं आता…
तुझे खोने का खौफ जबसे निकला है बाहर,
तुझे पाने की जिद भी टिक न सकी दिल में…

 कामयाबी, तेरे लिए हमने खुदको को कुछ यूँ तैयार कर लिया, 
मैंने हर जज़्बात बाज़ार में रख कर इश्तेहार कर लिया…

Zakir Khan Poetry Shunya

Zakir Khan Poetry Shunya –

मैं शून्य पे सवार हूँ
बेअदब सा मैं खुमार हूँ
अब मुश्किलों से क्या डरूं
मैं खुद कहर हज़ार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
उंच-नीच से परे
मजाल आँख में भरे
मैं लड़ रहा हूँ रात से
मशाल हाथ में लिए
न सूर्य मेरे साथ है
तो क्या नयी ये बात है
वो शाम होता ढल गया
वो रात से था डर गया
मैं जुगनुओं का यार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
भावनाएं मर चुकीं
संवेदनाएं खत्म हैं
अब दर्द से क्या डरूं
ज़िन्दगी ही ज़ख्म है
मैं बीच रह की मात हूँ
बेजान-स्याह रात हूँ
मैं काली का श्रृंगार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
हूँ राम का सा तेज मैं
लंकापति सा ज्ञान हूँ
किस की करूं आराधना
सब से जो मैं महान हूँ
ब्रह्माण्ड का मैं सार हूँ
मैं जल-प्रवाह निहार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ

Zakir Khan Ruhaani Ishq

Zakir Khan Ruhaani Ishq

Bohut hua Ruhaani Ishq ab ke to milna hai tumse,
Gazalein nahi likhni hai chhuna hai tumko…
Wo hazar baar ke padhe hue Khat ek aur baar nahi padhne hai mujhe,
Mujhe apni Ungliya tumhari Hateli pe chahiye…
Chum lena hai Maatha tumhara, Seene se laga lena hai tumko, Baaho mein bhar lena hai..
Bohot hua Ruhaani Ishq ab ke to milna hai tumse…
Aur phone pe to bilkul baat nahi karni hai,
Par tumhare kaano par se baal hataana hai aur ek chhotisi baali pehna dena hai tumko...
Bicchiya, Payal, Bindi sab kuch apne haato se pehnana hai,
Ab Khushbu Mehsoos nahi karni hai tumhari…
Bass palko ko band hote hue aur khulte dekhna hai,
Kuch kaam batana hai tumko,
Fir tumhare utthkar jaane par kalaai se pakadkar baitha dena hai tumko,
Bohot hua Ruhaani Ishq ab ke to milna hai tumse…

Friday, October 26, 2018 6:00 PM

2 Line Shayari #3मन का कोई कोना अंधेरे में ना रहे,

अक्सर दिखावे का प्यार ही शोर करता है,
सच्ची मोहब्बत तो इशारों में ही सिमट जाती है। 💞
हम तो आदी है सह लेंगे तेरा दिया हुआ हर जख्म ऐ दोस्त,
लेकिन सोचते है अगर तुझे किसी ने ठुकराया तो तेरा क्या होगा। 💔
में कभी पुराने फ़टे कपड़े पहनने में नही हिचकिचाता,
मुझे याद है वो तपते दिनों में पापा का काम करना। ✍
अगर तू शोर है तो मेरी खमोशी तोड़ के दिखा,
अगर तू इश्क़ है तो मेरी रूह मे उतर कर दिखा। 💕
मन का कोई कोना अंधेरे में ना रहे,
एक चिराग भीतर भी जलाओ यारों। 💕
कहतें हैं कि मोहबत एक बार होती है..
पर मैं जब जब उसे देखता हूँ मुझे हर बार होती है।
अब तो स्याही भी ना सूख पाती है, अखबार की,
रोज़ एक और खबर आ जाती है, बलात्कार की।
ढूँढती हैं तुम्हें बेतहाशा मेरी नज़र,
ए हवा अब तो दे दे उन्हें ये ख़बर।
तू सिगरेट की पहली फूंक की तरह है तू,
जरूरी भी है और नुकसानदायक भी।
मैंने तो यूँ ही देखा था दीदार-ए-शौक की खातिर,
तुम दिल में उतर जाओगे ऐसा कभी सोचा ना था। 
-UNKNOWN

2 Line Shayari #2वो एक ख्याल है मेरा,

अश्क़ बह गए आँखों से मगर इतना कह गए,
फिर आएंगे तेरी आँखों में तू अपना सा लगता है।
कर दे नजर-ए-करम मुझपर मैं तुझ पर एतबार कर लूँ,
दीवाना हूं मैं तेरा ऐसा कि दीवानगी की हद पार कर लूं।
वो एक ख्याल है मेरा,
जो अक्सर मेरे सुकूँ से लड़ता है। 💕
ऐसा नही की आपकी याद आती नही,
ख़ता सिर्फ़ इतनी है के हम बताते नही!
महोब्ब्त दिल में कुछ ऐसी होनी चाहिये की हासिल भले,

दुसरे को हो.. पर कमी उसको ज़िन्दगी भर अपनी होनी चाहिये।
इँतजार करते करते एक और रात बीत जायेगी,
पता हैं तुम नहीं आओगे और ये तनहाई जीत जायेगी।
दिल लगाने वालों का कोई मजहवे इश्क़ नहीं होता,
तबीयत जिस पे आ जाए वो ही दिल अजीज होता है।
किस्मत के तराजू में तौलोगे तो फकीर है हम
लेकिन दर्द ऐ दिल मे हम सा नवाब कोई नही।
मेरी​ सांस मेरी धड़कन मेरी जान हो तुम
इश्क की शुरुआत हूं मैं और अंजाम हो तुम।
तुम्हारे होगें चाहने वाले बहुत इस कायनात में,😍
मगर इस पागल की तो कायनात ही तुम हो। 😍😘
-UNKNOWN

2 Line Shayari #1 उसकी यादों से भरी है, मेरे दिल की तिजोरी,

दीवाना उस ने कर दिया एक बार देख कर,
हम कर सके न कुछ भी लगातार देख कर।
दिखने में वो बहुत गरीब थी साहब पर..
उसकी हँसी किसी शहजादी से कम नहीं थी।
सुबह की ख़्वाहिशें शाम तक टाली हैं,
कुछ इस तरह हमने ज़िंदगी सम्भाली है।
मोहब्बत बुरी है बुरी है मोहब्बत,
कहे जा रहे है किये जा रहे है।
कुछ भी लिखूँ, कुछ भी कहूँ,
बिन तुम्हारे सब अधूरा है।
कभी न कभी वो मेरे बारे में सोचेगा ज़रूर..
की हासिल होने की उम्मीद भी नहीं थी.. फिर भी वफ़ा करती थी। 💕
तेरे एहसास की खुशबू रग-रग में समाई है..
अब तु ही बता, क्या इसकी भी कोई दवाई है।
किस उम्र में आकर मिलोगे तुम हमसे सनम,
जब हाथों की मेंहदी बालों में लग रही होगी।
उसकी यादों से भरी है, मेरे दिल की तिजोरी,
कोई कोहिनूर भी दे तो भी मैं सौदा ना करूँ।
महफूज़ हैं तेरे प्यार के नगमे इस दिल में,
जब मन करे तो दरवाज़ा खटखटा देना।
-UNKNOWN

Kaka Hathrasi- हास्य दोहे

अँग्रेजी से प्यार है, हिंदी से परहेज,
ऊपर से हैं इंडियन, भीतर से अँगरेज
#
अंतरपट में खोजिए, छिपा हुआ है खोट,
मिल जाएगी आपको, बिल्कुल सत्य रिपोट
#
अंदर काला हृदय है, ऊपर गोरा मुक्ख,
ऐसे लोगों को मिले, परनिंदा में सुक्ख
#
अक्लमंद से कह रहे, मिस्टर मूर्खानंद,
देश-धर्म में क्या धरा, पैसे में आनंद
#
अंधा प्रेमी अक्ल से, काम नहीं कुछ लेय
प्रेम-नशे में गधी भी, परी दिखाई देय
#
अगर फूल के साथ में, लगे न होते शूल
बिना बात ही छेड़ते, उनको नामाक़ूल
#
अगर चुनावी वायदे, पूर्ण करे सरकार
इंतज़ार के मजे सब, हो जाएं बेकार
#
मेरी भाव बाधा हरो, पूज्य बिहारीलाल
दोहा बनकर सामने, दर्शन दो तत्काल
- काका हाथरसी

Ramdhari Singh Dinkar - कलम, आज उनकी जय बोल।


जो अगणित लघु दीप हमारे,
तूफ़ानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन,
मांगा नहीं स्नेह मुँह खोल।
कलम, आज उनकी जय बोल।

पीकर जिनकी लाल शिखाएं,
उगल रही सौ लपट दिशाएं,
जिनके सिंहनाद से सहमी,
धरती रही अभी तक डोल।
कलम, आज उनकी जय बोल।

अंधा चकाचौंध का मारा,
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के,
सूर्य, चन्द्र, भूगोल, खगोल।
कलम, आज उनकी जय बोल।
रचनाकार:

 रामधारी सिंह दिनकर | Ramdhari Singh Dinkar


आज फिर
किसी का गम, अपना बनाने को जी करता है,
किसी को दिल में, बिठाने को जी करता है,
आज दिल को क्या हुआ, खुदा जाने,
बुझती हुई शमा, फिर जलाने को जी करता है,
आफतों ने, जर्जर कर दिया घर मेरा,
उसकी दरोदीवार, फिर सजाने को जी करता है,
एक मुद्दत गुज़री, जिसका साथ छूटा,
आज फिर, उसका साथ पाने को जी करता है!
💕💕
-Unknown.

Wednesday, October 24, 2018 11:15 PM

ये किताबों के किस्से, ये फसानो की बातें

किताबों के किस्से

ये किताबों के किस्से, ये फसानो की बातें,
निगाहों की झिलमिल जुदाई की रातें..
मोहब्बत की कसमें, निभाने के वादे,
ये धोखा वफ़ा का, ये झूठे इरादे..
ये बातें किताबी, ये नज्में पुरानी,
ना इन्की हकीक़त, ना इनकी कहानी..
न लिखना इन्हें, ना महफूज़ करना,
ये जज्बे हैं बस, इनको महसूस करना..!!

-Unknown.




ज़रा सी ज़िन्दगी में, व्यवधान बहुत हैं,

ज़रा सी ज़िन्दगी

ज़रा सी ज़िन्दगी में, व्यवधान बहुत हैं,
तमाशा देखने को यहां, इंसान बहुत हैं!
कोई भी नहीं बताता, ठीक रास्ता यहां,
अजीब से इस शहर में, ‘नादान’ बहुत हैं!
न करना भरोसा भूल कर भी किसी पे,
यहां हर गली में साहब बेईमान बहुत हैं!
दौड़ते फिरते हैं, न जाने क्या पाने को,
लगे रहते हैं जुगाड में, परेशान बहुत है!
खुद ही बनाते हैं हम, पेचीदा ज़िन्दगी को,
वर्ना तो जीने के नुस्खे, आसान बहुत हैं! 📕 ✍

-Unknown.


ढूढ़ना ही है तो...

ढूढ़ना ही है तो परवाह करने वालों को ढूंढ़िये साहेब,
इस्तेमाल करने वाले तो ख़ुद ही आपको ढूंढ लेंगे।
-Unknown.

मन नही करता


कभी नींद आती थी..
आज सोने को “मन” नही करता,
कभी छोटी सी बात पर आंसू बह जाते थे..
आज रोने तक का “मन” नही करता,
जी करता था लूटा दूं खुद को या लुटजाऊ खुद पे..
आज तो खोने को भी “मन” नही करता,
पहले शब्द कम पड़ जाते थे बोलने को..
लेकिन आज मुह खोलने को “मन” नही करता,
कभी कड़वी याद मीठे सच याद आते हैं..
आज सोचने तक को “मन” नही करता,
मैं कैसा था? और कैसा हो गया हूं..
लेकिन आज तो यह भी सोचने को “मन” नही करता। 📕✍

-Unknown.

आंखों से आँखे....

आंखों से आँखे मिला गया कोई,,
दिल की कलियाँ खिला गया कोई..
दिल की धड़कन यूँ बेताब न थी,,
मुझको दीवाना बना गया कोई..
जो बात उसे कहनी ना थी,,
हाले दिल अपना सुना गया कोई..
सूने मन के इस आंगन में,,
आस मिलन की जगा गया कोई..
रहता हूँ मैं कुछ खोया खोया सा,,
जाने क्यूँ मुझको रुला गया कोई..!!

-Unknown.